शुक्रवार, 6 नवंबर 2009

मेरा अनोखा सपना


नागार्जुन की कविता आज सुबह से खूब याद आ रही है, चंदू मैंने सपना देखा. पहली बार में इस कविता का मतलब समझ नहीं पाई थी. बस तुकबंदी देखकर यह लगा था कि एनसीआरटी की किसी किताब की कोई कविता है. खैर हुआ यह कि रात को एक अजब सा सपना मुझे आया, जो इस कविता की तरह ही उलझा गया.

मैं छत पर लेटी थी, कि अचानक चांद का रंग लाल हो गया और फिर उस पर कुछ लिखा सा दिखने लगा, शायद किसी शख्स का नाम. हां, नाम ही तो था, उस का नाम जिस ने मुझ इसलिए छोड दिया, ताकी वह अपने घर वालों की खुशी से शादी कर सके. खैर शायद उस नाम का बोझ इतना था कि चांद नीला पड़ गया और लहराने लगा. कुछ ही देर में वह टूट कर मेरी चारपाई पर आ गिरा. मैं भाग कर पापा के पास गई और कहा, पापा देखिए चांद गिर गया. पापा ने कहा बावरी बेटी बाहर जा कर तो देख कितनी रोशनी है अगर चांद गिर गया, तो रोशनी कैसी. मैंने बाहर देखा, तो वाकई रौशनी थी बिलकुल पूर्णिम जैसी. लेकिन चांद आसमान से गायब था.
और मैं समझ गई कि चांद के सामने तारों को कोई देखता ही नहीं था, जब वह गिरा तो तारों को मौका मिला कि वह अपनी चमक बिखेर पाते. भीतर पापा के पास दोबारा गई, तो उन्होंने कहा यह है क्या इसे खोल कर तो देख. खोलती कैसे उस पर मेरे प्यार का नाम लिखा था. पापा ने हाथ से छीन कर उसे खोला, तो उस के भीतर से एक डस्टबिन और एक माउस निकला. इतनी देर में मेरी आंख खुल गई और मुझे याद आया कि आज शाम को आफिस से घर लौटते समय मुझे एक डस्टबिन और एक माउस खरीदने हैं.
अगर आप इस का मतलब समझ पाएं हों, तो कृपया मुझे भी अनुग्रहित करें...

5 टिप्‍पणियां:

  1. आपके सपनों की सही व्याख्या तो एक मनोवैज्ञानिक ही कर सकता है वैसे वाँद मामा तो गुस्साकर ही लाल हुए होंगे और हो सकता है कि तारों पर रोशनी की जिम्मेदारी छोड़ कर कोप भवन में चले गए हों।

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  3. Ek Achhi Gadya Rachna Ka Jikra Aapke Dwara. Is Tarah Ki Rachnayen Badi Hi Rochak Hoti Hai.

    Thank You For Sharing. Padhe प्यार की बात, Hindi Love Story aur Bahut Kuch Online.

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  4. Ek Achhi Gadya Rachna Ka Jikra Aapke Dwara. Is Tarah Ki Rachnayen Badi Hi Rochak Hoti Hai.

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